अनुगूंज आईआईटी रुड़की की एक पहल है, जो नवीकरणीय ऊर्जा, कौशल प्रशिक्षण एवं उद्यम विकास को जोड़कर उत्तराखण्ड के पहाड़ों की महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए आजीविका सृजित करती है — और क्षेत्र के अनुभवों को नीति निर्माताओं तक पहुँचाती है।
अनुगूंज — पहाड़ों में सतत परिवर्तन की प्रतिध्वनि — परियोजना “उत्तराखण्ड के ग्रामीण समुदायों हेतु एकीकृत आजीविका, नवीकरणीय ऊर्जा एवं पर्यावरणीय सहनशीलता पहल” का सार्वजनिक नाम है, जिसका नेतृत्व आईआईटी रुड़की का वास्तुकला एवं नियोजन विभाग TIDES बिज़नेस इन्क्यूबेटर के साथ कर रहा है।
परियोजना जुलाई–अगस्त 2025 में प्रारम्भ हुई। पृष्ठभूमि डेटा अध्ययन के आधार पर पाँच पर्वतीय जनपदों के छह विकासखण्ड चुने गए। प्रत्येक विकासखण्ड में टीम खण्ड विकास कार्यालय, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) एवं REAP के साथ कार्य करती है तथा एक स्थानीय चैम्पियन की पहचान करती है, जो महिलाओं को संगठित करती हैं, कार्यक्रम की जानकारी फैलाती हैं और प्रतिभागियों को प्रशिक्षण स्थल तक लाती हैं।
परियोजना की कार्यप्रणाली
- प्रारम्भिक अध्ययन (अगस्त–नवम्बर 2025) — क्षेत्र भ्रमण, ब्लॉक अधिकारियों व स्वयं सहायता समूहों से परामर्श, नवीकरणीय ऊर्जा स्थलों एवं स्थानीय उद्यमों का अध्ययन।
- चरण I — प्रशिक्षण (नवम्बर 2025 – अगस्त 2026) — स्टार्टअप्स एवं पेशेवर सलाहकारों के सहयोग से तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण: सौर ऊर्जा उपकरण, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, बेकरी, ऐपण कला एवं भीमल रेशा शिल्प।
- चरण II — नीति संवाद (सितम्बर 2026 से) — मुख्य विकास अधिकारियों तथा कृषि, पशुपालन, वन आदि विभागों के प्रमुखों के साथ जनपद स्तरीय संवाद, जिसमें निष्कर्ष, चुनौतियाँ एवं संभावित समाधान प्रस्तुत किए जाते हैं।
- अनुशंसाएँ (फ़रवरी 2027 तक) — सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचाने हेतु राज्य सरकार को सुझाव।