
महिला कारीगरों ने कुमाऊँ की पारम्परिक ऐपण कला को बिक्री योग्य उत्पादों — कप, थाली, स्टोल, आभूषण एवं सजावटी वस्तुओं — में बदलना तथा मूल्य निर्धारण व विपणन सीखा।
ऐपण कुमाऊँ की पारम्परिक भूमि एवं भित्ति कला है, जो गेरू की पृष्ठभूमि पर चावल के घोल (बिस्वार) से बनाई जाती है। कार्यशाला ने महिलाओं को इस धरोहर को रोज़मर्रा के उत्पादों पर उतारकर आय अर्जित करने में सहायता की।
कार्यशाला में शामिल विषय:
- ऐपण आकृतियाँ, उनका अर्थ एवं रंग; कागज़ व बोर्ड पर अभ्यास
- सिरेमिक, वस्त्र, लकड़ी की थाली एवं आभूषणों पर ऐपण
- उत्पादों की लागत, मूल्य निर्धारण, पैकेजिंग एवं प्रदर्शन
- अधिकारियों की उपस्थिति में प्रदर्शनी एवं प्रमाण-पत्र वितरण